किस्सा कांशीराम का #17: मैं अपने समाज की किसी भी बेटी को फूलन बनकर जंगल में नहीं जाने दूंगा, क्योंकि हमारे लिए तो पूरा देश ही जंगल है

मैं अपने समाज की किसी भी बेटी को फूलन बनकर जंगल में नहीं जाने दूंगा, क्योंकि हमारे लिए तो पूरा देश ही जंगल है…

उपरोक्त शब्द साहेब कांशीराम ने 26 फरवरी 1994 को कहे थे, जब 19 फरवरी 1994 को रिहाई के ठीक सात दिन बाद फूलन देवी 11 साल की लंबी जेल की सजा काटने के बाद साहेब से मिलने के लिए दोपहर 12 बजे गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब रोड स्थित बसपा के केंद्रीय कार्यालय पहुंची थीं.

सबसे पहले फूलन देवी ने साहेब के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया और फिर अपना दर्द बयां करते हुए बोलीं,

“साहेब जी, मैंने अब तक आपको सिर्फ़ तस्वीरों में ही देखा है. मुझे न्याय दिलाने के लिए मैं आपकी बहुत आभारी हूँ.” फूलन और भी गंभीर होते बोलीं गई, “पिछले 15-16 सालों से मेरे साथ बहुत बडा धोखा हुआ है और बहुत अत्याचार हो रहे हैं. क्योंकि ऊँची जाति के लोग हमें जानवरों की तरह ही समझते हैं. आप देखिए, सरकारों ने बड़े-बड़े डकैतों को रिहा कर दिया है, लेकिन मैं पिछले 11 सालों से जेल में सड़ रही हूँ.” आपकी सरकार ने मेरे साथ न्याय करके मुझे आज़ादी दी है लेकिन ऊँची जाति के लोग अभी भी मेरे ख़िलाफ़ साज़िश रचने में लगे हूऐ हैं. फूलन देवी ने इस मौके पर यह भी कहा कि जेल में बैठकर मैं हमेशा सोचती थी कि जब भी जेल से बाहर जाऊँगी तो आपसे शिकायत ज़रूर करूँगी कि आपने मेरी रिहाई के लिए कोई प्रयास क्यों नहीं किया. लेकिन अब आपकी सरकार ने मेरे सारे मुक़दमे वापस ले लिए हैं और मुझे न्याय दिया है, इसके लिए मैं हमेशा आपकी ऋणी रहूँगी.

दो घंटे चली इस मुलाक़ात के अंत में साहेब ने फूलन देवी को संबोधित करते हुए कहा कि मैं हमेशा अपने समाज को जागरूक करने की कोशिश में लगा रहता हूँ जब कि अभी भी समय है ताकि मेरे समाज की किसी भी बेटी को फूलन बनकर जंगल में न जाना पड़े क्योंकि हमारे लिए पूरा देश ही जंगल है.

मैं 1989 से आपकी रिहाई के लिए प्रयास कर रहा हूँ, जब मुलायम सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे. लेकिन जनता दल का उन पर इतना दबाव था कि हमारी कोशिशें कामयाब नहीं हो सकीं. अब हमारी कोशिशों ने देश का माहौल बदल दिया है. अगर माहौल बदला है, तो हमारे साथ, बहुजन समाज की हर बेटी को न्याय मिलेगा.

साहेब और फूलन देवी के बीच इस मुलाकात में कई अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे. यह याद रखना चाहिए कि जब फूलन देवी मध्य प्रदेश की ग्वालियर जेल में थीं, तब साहेब ने अपने एक विश्वस्त व्यक्ति दीवान सिंह लोधी के माध्यम से उन्हें संदेश भेजा था, जिसमें उन्हें राजनीतिक पारी खेलने के लिए तैयार रहने को कहा गया था. साहेब ने दीवान सिंह लोधी को मध्य प्रदेश विधानसभा के टिकट देने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी. जब साहेब को अपने सूत्रों से खबर मिली कि दीवान सिंह लोधी ने नरसिम्हा राव (जो 1991 से 1996 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे थे) से उनकी इच्छा के अनुसार उम्मीदवार चुनने के बदले में तीन करोड़ रुपये लिए थे, तो साहेब ने उन्हें जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया. बाद में, दीवान सिंह ने अपनी अलग बी.एस.पी. (आंबेडकरवादी) पार्टी बनाई. फूलन देवी ने हिंदी सिनेमा के प्रेमी लड़कों कहे जाने वाले राजेश खन्ना और शत्रुघ्न सिन्हा के खिलाफ दिल्ली से पहला लोकसभा चुनाव भी लड़ा था. जिसमें राजेश खन्ना जीते थे. और फिर फूलन देवी मिर्जापुर से दो बार संसद सदस्य बनीं.

आप लोग अपने बल पर सत्ता हथियाना सीखिए, छोटे से छोटा आदमी भी दूसरों के बल पर सांसद/विधायक बन जाता है – साहेब कांशीराम.

(स्रोत & साभार : – मैं कांशीराम बोलता हूं-2)

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