घर में लगे चित्र से चरित्र का बोध होता है

एक बार गर्मी की छुट्टी में एक आदमी अपनी जीवनसंगिनी एवं बच्चे के साथ शहर से घर जा रहा था. बस से उतरने के बाद गाँव का रास्ता पकड़ कर पैदल जा रहा था. अधिक धूप होने के कारण एक पेड़ के नीचे आराम करने लगा. रास्ते के दूसरी तरफ बाबासाहेब डॉ.अंबेडकर और तथागत बुद्ध की प्रतिमा लगी थी.

प्रतिमा को देखकर बच्चे ने पूछा पापा ये किसकी प्रतिमा है?

पिता ने कहा ये प्रतिमा बाबासाहेब डॉ.अंबेडकर की है. बेटा इन्ही की बदौलत शिक्षा पायी, नौकरी पायी. इन्ही के बदौलत आपको अच्छे स्कूल में पढ़ा पा रहा हूँ. इतना ही नही आपकी मम्मी को अच्छी साड़ी तथा सुन्दर गहने दे पा रहा हूँ. यहाँ तक की हमारा समाज आज जो सम्मानित तरीके से जीवन जी रहा है, वो इन्हीं की देन है.

अच्छा पापा और वह दूसरी प्रतिमा किसकी है? बेटा वह तथागत बुद्ध की जो बाबासाहेब के गुरु और आदर्श थे. बाबासाहेब डॉ.अंबेडकर इन्ही के द्वारा दिए गये धम्म को मानते थे.

बेटा बोला अच्छा तो पापा बताइए हमारे घर में इनकी फोटो क्यों नहीं है. पिता थोड़ा सहमते हुए बोला, बेटा! गलती हो गयी.

पापा हमारे घर मे जो फोटो लगे है जिनकी आप सुबह शाम पूजा करते है वो किसके है और ये हमारे लिए तथा हमारे समाज के लिए क्या किए हैं?
पिता थोड़ा लड़खड़ाती जुबान से बोला बेटा वो तो हमारे तथा हमारे समाज के लिए कुछ नही किए है. अच्छा वो किस धर्म के लोगो की फोटो है और उस धर्म ने हमारे समाज को क्या दिया?

बेटा वो तो…धर्म के लोगो के फोटो है और उन लोगो ने हमारे लोगो को कुछ नही दिया है और उस धर्म ने हमारे समाज को अन्याय अत्याचार अपमान दिया. यहाँ तक की हमे अछूत बनाकर तिरस्कृत कर दिया.

पापा यह कैसी बिडम्बना है कि जिस धर्म ने हमारे समाज के साथ अन्याय, अत्याचार, अपमान किया. यहाँ तक की अछूत बनाया. उसके लोगो को आप पूजते है और उस धर्म को मानते है और जिसने आपको सब कुछ दिया उन महापुरूषों की फोटो तक नहीं लगाई. उनके बताए गए धम्म को नहीं मानते यह बड़े ही दुख की बात है.

पापा मुझे आपको पापा कहने मे शर्म महसूस हो रहा है.

बेटा मुझसे गलती हो गई मुझे माफ कर दो.

पापा इस गलती को आप स्वयं सुधारिए.

वो कैसे?

अभी वापस घर चलकर बाबासाहेब डॉ.अंबेडकर और तथागत बुद्ध की फोटो लगाईए और अन्य फोटो हटाए. नहीं तो मैं आज के बाद उस घर में नही जाउँगा!

पिता ने तुरन्त वापस जाकर वैसा ही किया जैसा बेटे ने कहा था!

साथियों कहने का यह तात्पर्य है कि अपने घरो में तथागत बुद्ध, बाबासाहेब डॉ.अंबेडकर तथा अपने सभी महापुरूषों की फोटो रखे और उनके बारे में अपने बच्चो को बताए ताकि आने वाली पीढ़ी बाबासाहेब डॉ.अंबेडकर के मिशन और राष्ट्र का निर्माण मे योगदान दे सके.

(स्रोत: सोशल मीडिया से प्राप्त पोस्टट)

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