वायरल ग्राफिक में मायावती के नाम से दावा किया जा रहा है कि आरक्षण के खिलाफ जुटे लोगों की आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने की मांग “उचित एवं देशहित में” है.
फैक्ट चेक का निष्कर्ष: गलत.
मायावती ने 23 अगस्त 2026 को अपने सोशल मीडिया पोस्ट में इसके ठीक उलट बात कही थी. उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर एससी, एसटी और ओबीसी के आरक्षण के खिलाफ जुटे लोगों की आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने की मांग को “कतई भी उचित व देशहित में नहीं” बताया था.
क्या कहा था मायावती ने?
मायावती के मूल पोस्ट में साफ तौर पर कहा गया कि जंतर-मंतर पर एससी, एसटी और ओबीसी समाज को दिए गए आरक्षण के विरुद्ध आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने की जो मांग उठाई गई है, वह उचित और देशहित में नहीं है. उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों से समतामूलक समाज और विकसित व सम्मानित देश बनाने के संवैधानिक प्रयासों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए.
1. दिल्ली के जंतर मंतर पर संविधान में एस.सी., एस.टी. व ओ.बी.सी. समाज को दिये गये आरक्षण के विरुद्ध अभी हाल ही में जमा हुये कुछ लोगों द्वारा आर्थिक आधार पर आरक्षण को लागू करने की उठाई गई यह नई माँग कतई भी उचित व देशहित में नहीं है। उन्हें आरक्षण के सम्बंध में ऐसा कोई कार्य नहीं…
— Mayawati (@Mayawati) August 23, 2026
उन्होंने अपने पोस्ट में जातिवाद को खत्म करने पर जोर देते हुए बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम से “जातिवाद का परित्याग ही सबसे बड़ी देशभक्ति है” वाली पंक्ति का उल्लेख भी किया.
आर्थिक आधार पर आरक्षण को लेकर मायावती ने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें पहले से गरीबी उन्मूलन के अनेक कार्यक्रम चलाती हैं. उनके मुताबिक इन योजनाओं का लाभ लोगों तक ठीक से नहीं पहुंचना सरकारी व्यवस्था की समस्या है. उन्होंने आर्थिक आधार पर आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था का भी उल्लेख किया और कहा कि इसका लाभ गरीब सवर्ण परिवारों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच रहा.
मायावती ने आगे कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी समाज के लोग आज भी गरीबी, जातीय द्वेष, शोषण और अत्याचार जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं. उन्होंने सरकारों से आरक्षण विरोधी तत्वों को संरक्षण न देने और आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति न करने की अपील की.
वायरल ग्राफिक में क्या है?

वायरल ग्राफिक में इसके विपरीत लिखा है कि “आर्थिक आधार पर आरक्षण को लागू करने की मांग उचित एवं देशहित में है.”
यानी ग्राफिक में मायावती के वास्तविक बयान का अर्थ उलट दिया गया है. उपलब्ध मूल पोस्ट और उसी दिन प्रकाशित कई स्वतंत्र समाचार रिपोर्टें मायावती के वास्तविक रुख की पुष्टि करती हैं.
फैक्ट-चेक रेटिंग: ❌ गलत/भ्रामक
निष्कर्ष: वायरल ग्राफिक में मायावती के नाम से जो बात लिखी गई है, वह उनके 23 अगस्त के वास्तविक पोस्ट से मेल नहीं खाती. वास्तविक पोस्ट में उन्होंने आर्थिक आधार पर आरक्षण की इस मांग का विरोध किया था, समर्थन नहीं.

