लखनऊ, 11 अगस्त 2026। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने देश के छात्रों और युवाओं, खासकर Gen-Z, से अपील की है कि वे अपनी समस्याओं को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज जरूर उठाएं, लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष की राजनीति से सावधान रहें. उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दल युवाओं के आंदोलनों को अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं.
मायावती ने मंगलवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में दिल्ली और रांची में चल रहे छात्र-युवा आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन आंदोलनों में युवाओं की वास्तविक समस्याओं के समाधान से ज्यादा राजनीतिक स्वार्थ दिखाई दे रहा है.
छात्र और Gen-Z अपने मुद्दों के लिए आवाज उठाएं, लेकिन राजनीतिक इस्तेमाल से बचें
मायावती ने कहा कि आज देश का युवा पढ़ाई, रोजगार, भर्ती और भविष्य से जुड़ी कई समस्याओं को लेकर चिंतित है. ऐसे में छात्रों और नौजवानों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करना चाहिए.
हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि उनके आंदोलनों को किसी राजनीतिक दल के चुनावी या राजनीतिक स्वार्थ का माध्यम नहीं बनने देना चाहिए.
उनके मुताबिक, छात्र और Gen-Z अपने मुद्दों को लेकर आंदोलन करते हैं, लेकिन राजनीतिक दल कई बार उन्हीं मुद्दों की आड़ में अपनी राजनीति आगे बढ़ाने लगते हैं.
दिल्ली के छात्र आंदोलन का मायावती ने किया जिक्र
मायावती ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र-युवा आंदोलन का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि आंदोलन की शुरुआत छात्रों और नौजवानों की समस्याओं को लेकर हुई थी, लेकिन बाद में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने इसे अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल किया.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इसी आंदोलन के मुद्दों को लेकर संसद की कार्यवाही को प्रभावित किया जा रहा है.
रांची के छात्र आंदोलन को लेकर भी उठाए सवाल
बसपा प्रमुख ने रांची में चल रहे छात्र-युवा आंदोलन का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि दिल्ली का आंदोलन खत्म होने के बाद रांची में Gen-Z और छात्रों का आंदोलन शुरू हुआ.
मायावती का आरोप है कि यहां भी युवाओं की समस्याओं के समाधान के बजाय राजनीतिक दल अपने-अपने हितों के अनुसार आंदोलन से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं.
उन्होंने इसे सत्ता पक्ष और विपक्ष की राजनीति से जोड़ते हुए युवाओं को सतर्क रहने की सलाह दी.
‘सत्ता और विपक्ष के राजनीतिक स्वार्थ’ से सावधान रहने की अपील
मायावती ने कहा कि छात्रों और नौजवानों को यह समझना होगा कि उनके आंदोलन का वास्तविक उद्देश्य उनकी समस्याओं का समाधान होना चाहिए.
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी मांगों के लिए संघर्ष करते समय राजनीतिक दलों के स्वार्थ को पहचानें और किसी भी पक्ष के राजनीतिक इस्तेमाल से बचें.
उनका कहना है कि छात्र और युवा अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठाएं, लेकिन उन्हें किसी राजनीतिक दल का मोहरा नहीं बनना चाहिए.
रोजगार के मुद्दे पर BSP सरकारों का उदाहरण
मायावती ने अपने बयान में उत्तर प्रदेश की पिछली बसपा सरकारों का भी उल्लेख किया.
उन्होंने दावा किया कि BSP की चार सरकारों के दौरान छात्रों और नौजवानों की समस्याओं को प्राथमिकता दी गई और सरकारी तथा निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया.
उन्होंने कहा कि उस समय सरकारी भर्तियों पर लगी रोक हटाई गई और बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार के अवसर मिले.
सरकारी क्षेत्र कमजोर होने से रोजगार पर असर: मायावती
मायावती ने सार्वजनिक क्षेत्र को कमजोर किए जाने और निजी क्षेत्र को बढ़ावा दिए जाने पर भी सवाल उठाए.
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार के अवसर कम होने का सीधा असर गरीब, बेरोजगार और वंचित वर्गों पर पड़ता है.
उनके मुताबिक, सरकारों को रोजगार के अवसर बढ़ाने और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए.
सरकारी नौकरियों में आरक्षण को लेकर चिंता
बसपा प्रमुख ने सरकारी नौकरियों में दलितों, आदिवासियों और अन्य पिछड़े वर्गों के आरक्षण का मुद्दा भी उठाया.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी नौकरियों में इन वर्गों के लिए आरक्षण का लाभ लगातार सीमित होता जा रहा है और इसे निष्प्रभावी बनाने की कोशिशें हो रही हैं.
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया. यह भी उनके राजनीतिक बयान में किया गया आरोप है.
निजी क्षेत्र में भी आरक्षण लागू करने की मांग
मायावती ने कहा कि BSP निजी क्षेत्र के खिलाफ नहीं है, लेकिन जिस तरह सरकारी क्षेत्र में आरक्षण की व्यवस्था है, उसी तरह निजी क्षेत्र में भी दलितों, आदिवासियों और अन्य पिछड़े वर्गों को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए.
उन्होंने कहा कि BSP सरकार के दौरान सरकारी सहयोग से स्थापित उद्योगों में भी आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई थी.
BSP ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति पर चलने वाली पार्टी
मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश में BSP की सरकारों ने सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर काम किया.
उन्होंने BSP की नीति को “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” बताते हुए कहा कि पार्टी का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों के हितों की रक्षा करना है.
उन्होंने दलित, आदिवासी, पिछड़े, मुस्लिम और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के साथ-साथ किसान, मजदूर, बेरोजगार, कर्मचारी, व्यापारी, छात्र और युवाओं का भी उल्लेख किया.
UP, उत्तराखंड और पंजाब के आगामी चुनावों का जिक्र
मायावती ने अपने बयान के अंत में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों का भी उल्लेख किया.
उन्होंने सर्वसमाज से BSP को मजबूत करने की अपील की और कहा कि पार्टी की “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” की नीति के आधार पर उसे कामयाब बनाया जाना चाहिए.
मायावती के बयान का मुख्य संदेश क्या है?
मायावती के पूरे बयान को तीन बड़े मुद्दों में समझा जा सकता है—
पहला: छात्र और Gen-Z अपनी समस्याओं को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाएं, लेकिन उनके आंदोलनों का राजनीतिक इस्तेमाल न होने दें.
दूसरा: रोजगार और आरक्षण के सवाल को केवल सरकारी नौकरी तक सीमित न रखते हुए निजी क्षेत्र में भी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए.
तीसरा: आगामी चुनावों के मद्देनजर युवाओं, वंचित वर्गों और सर्वसमाज के लोगों को अपने राजनीतिक हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए.
The Suchak निष्कर्ष:
मायावती का यह बयान केवल छात्र आंदोलनों तक सीमित नहीं है. इसमें उन्होंने युवाओं के आंदोलन, रोजगार, सार्वजनिक क्षेत्र, आरक्षण और आगामी विधानसभा चुनावों को एक साथ जोड़कर अपनी राजनीतिक स्थिति रखी है. इसलिए इस बयान को समझने के लिए इसे केवल “Gen-Z को सलाह” के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा; इसमें BSP की व्यापक राजनीतिक रणनीति और आगामी चुनावों को लेकर उसका संदेश भी स्पष्ट दिखाई देता है.

