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साहित्य

एन दिलबाग सिंह का कॉलम: मैं भी अम्बेड़करवाद का हत्यारा हूँ

लोगों में अम्बेड़करवाद की कितनी समझ है, ये भी बहुत बड़ी पहेली है. विरोध के नाम पर ब्राह्मण का विरोध कर देना और अपनी...

किस्सा कांशीराम का #8: सुखद अटे है! तेज़ भागो, पीछे दौड़ता मुनीम कमरे का किराया लेने आ रहा है

पुणे में साहेब के संघर्ष भरे दिनों की कहानी. साहेब को नौकरी से इस्तीफा देने के बाद पुणे के पंजा मोहल्ले डिंकन जिमखाना के...

कविता: बदल दिया सदियों का इतिहास; इंद्रा साहेब की कविता

बुद्ध रैदास कबीर की वाणी,फूले शाहू अम्बेडकर नाम,किया संघर्ष जीवन भर,लाये लंदन से हक़ अधिकार। मनु ने लगाई प्राण की बाजी,त्याग दिया अन्न व जलपान,किया...

पौराणिक कथाएं – शूद्रों की गुलामी का षड्यंत्र ग्रंथ

विषमतावादी कथाओं का जाल और शूद्रों की गुलामी भारत का हिन्दू समाज वर्णव्यवस्था पर आधारित सहस्रों जातियों और उपजातियों में विखण्डित है। मैक्स मूलर और...

आओ असली सरस्वती माता को भी जाने: राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले

3 जनवरी को माँ सावित्रीबाई फुले का जन्म महोत्सव है. सावित्रीबाई फुले को महिलाओं में शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए जाना जाता है. देश...

राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फूले – भारत की प्रथम शिक्षिका

आज बहुजन समाज संग अन्य मानवतावादी लोग माता सावित्रीबाई फूले के जन्म दिन के अवसर पर उनके योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित...

कविता: लड़ेंगे कोरेगांव की तरह; भीमा कोरेगांव पर सूरज कुमार बौद्ध की कविता

जब भी मैं इतिहास की ओर देखता हूँ,मन परेशान सा उद्वेलित हो उठता है।सोचता हूँ कि क्या सच में कोई ईश्वर है?अगर हाँ तो...

किस्सा कांशीराम का #6: राजीव गांधी मेरे पास आया और कहने लगा कि हमें भी आपकी सेवा करने का मौका दो

बहुजन समाज पार्टी द्वारा देश भर में  बाबासाहेब डॉ अम्बेडकर जन्म शताब्दी वर्ष  के तेहत मनाये गये समारोहों की श्रंखला में 18 सितम्बर 1990...

कविता: भारत का संविधान है – चंद्रशिखा इंद्रा

भारत का संविधान है,हर भारतवासी का अभिमान है. देता यह समता का अधिकार है,स्वतंत्रता सबको सुनिश्चित करता,बंधुत्व का पैगाम है,भारत का संविधान है।हर भारतवासी का...

किस्सा कांशीराम का #5: पहले-पहल कुछ लोग मेरे बारे में अंदाज़ा लगाते थे कि ढेढ़ रुपये की टूटी चप्पल, फटी हुई पैंट-कमीज़ पहनने वाला...

बात 1977-78 की है, जिन दिनों साहेब दिल्ली में सरगर्म थे. लेकिन दिल्ली में साहेब की बात कोई भी सुनने को तैयार नहीं था....

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