ओपिनियन: बसपा की गद्दी कांटों का ताज

बाबासाहेब डा० अम्बेडकर के हमारे बीच से जाने के बाद मान्यवर साहेब कांशीराम जी ने ऐसे समय में अपना घर, परिवार, सम्पत्ति सब कुछ त्याग कर इस मूवमेंट को खड़ा किया था, जब उस समय की सत्ता धारी ताकतें बाबासाहेब डा० अम्बेडकर के नाम निशान को मिटाने में पूरी ताकत लगा रही थीं.

यह बार-बार दुहराने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए कि आज जो बाबासाहेब डा० अम्बेडकर के नाम का और काम का डंका देश के कोने-कोने से लेकर पूरी दुनिया में बज रहा है, उसकी स्थापना के हकदार मान्यवर कांशीराम साहेब ही हैं. इसमें भी कोई दो राय नहीं हो सकतीं कि बहन कुमारी मायावती जी को तलाशने और नेतृत्व क्षमता तराशने में मान्यवर कांशीराम साहेब का ही करिश्मा रहा.

उन्होंने अपने जीवन के अंतिम दौर में तत्कालीन समय, काल और परिस्थितियों के मद्देनजर बहन कुमारी मायावती जी को अपना उत्तराधिकारी घोषित करने का काम किया. यह प्रकृति का भी नियम है और हालात भी लगातार बदलते हैं, लेकिन राजनीति में परिस्थितियों के तेजी से बदलने के सबसे ज्यादा मामले देखे जा सकते हैं. अतः समाज हित में समय, काल और परिस्थिति के हिसाब से निर्णय लिए जाते हैं जो कई बार तात्कालिक रूप से अप्रिय भी हो सकते हैं.

दलित/बहुजन समाज का नेतृत्व संभालना कांटों भरा ताज ही कहा जा सकता है. एक ओर बहुत बड़ी चुनौती है कि बसपा के जनाधार को न केवल बनाये रखना है बल्कि उसे बड़ी संख्या में MLAs/MPs की सीटें जीतने में भी बदलना है. जिस तरह से बसपा विरोधी ताकतें हताशा, निराशा और  नकारात्मकता फैला रही हैं उसे आशा, उमंग और उत्साह में बदलने के नये-नये उपाय करने होंगे. दूसरी मनुवादी कहें या गैर बराबरी वाली ताकतें कहें, बसपा को रोकने के लिए साम दाम दण्ड भेद जैसे हर हथकंडे अपनाने में और तेजी लायेंगी जिसका मुकाबला केवल और केवल मान्यवर कांशीराम साहेब के बताए रास्ते पर चल कर ही किया जा सकता है.

बहुजन समाज और खास तौर से दलित समाज में यही संदेश पहुंच चुका है कि, “बाबासाहेब का मिशन अधूरा, बीएसपी करेगी पूरा” इसके साथ ही “वोट हमारा, राज तुम्हारा नहीं चलेगा, नहीं चलेगा.” इन्हीं सब नारों को बसपा के युवा घोषित उत्तराधिकारी को भी मजबूती तथा पूरी ताकत से आगे बढ़ाना होगा तभी दलित और बहुजन समाज का भरोसा जीता जा सकता है.

हममें से कुछ लोगों की ऐसी सोच हो सकती है कि इससे तो “परिवारवाद” को ही बढ़ावा मिलेगा तथा यह बसपा के बुनियादी सिद्धांत के विपरीत है, लेकिन एक गतिशील नेतृत्व उसे ही माना जाता है जो कि समय, काल और बदली हुई परिस्थितियों के अनुसार समाज के व्यापक हित में महत्वपूर्ण निर्णय ले सके. जो भी निर्णय लिया गया है उसकी आलोचना अपने स्थान पर है, लेकिन यह शुभ संकेत है कि उत्तराधिकारी की घोषणा होने के पश्चात सोशल मीडिया पर देखने सुनने से पता चल रहा है कि अधिकांश पढे लिखे युवाओं में एक नये जोश और उत्साह का संचार हुआ है और उन्हें आशा है कि भाई आकाश आनंद आने वाले समय में हर प्रकार की कठिन से कठिन चुनौती का अपनी सूझ-बूझ और नेतृत्व क्षमता से मुकाबला करने में अवश्य ही कामयाब होकर समाज के सम्मान और स्वाभिमान की लड़ाई को आगे बढ़ाने का काम करेंगे.

(लेखक: सोशल मीडिया से प्राप्त लेख)

Download Suchak App

खबरें अभी और भी हैं...

ओपिनियन: दलितों के साथ अनदेखी क्यों?

आज भी देश में अगर दलितों की स्थिति पर नजर डाली जाए तो उनकी स्थिति दयनीय बनी हुई है. मौजूदा वक्त में तो इसे...

मायावती बहनजी का बड़ा फैसला, आकाश के बाद ईशान भी गए, बहन दीपिका के लिए खोला दरवाजा

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती बहनजी ने परिवारवाद को लेकर अपने रुख को एक बार फिर स्पष्ट किया है. उन्होंने...

जेन-जी आंदोलन पर राजनीतिक दलों के प्रभाव से मायावती चिंतित, बसपा पदाधिकारियों को बड़ा निर्देश

नई दिल्ली/लखनऊ, 6 सितंबर 2026। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती बहनजी ने Gen-Z और Gen-Alpha युवाओं से जुड़े आंदोलनों को लेकर...

डॉ. राधाकृष्णन का जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में क्यों?

यह सवाल हैरान करने वाला है कि डॉ. राधाकृष्णन के जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में क्यों मान्यता दी गई? उनकी किस विशेषता...

मायावती का बड़ा ऐलान: अब किसी से गठबंधन नहीं, अकेले चुनाव लड़ेगी BSP; आकाश आनंद पर भी साफ संदेश

लखनऊ, 3 सितंबर 2026। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती बहनजी ने आज गुरुवार को लखनऊ में आयोजित पार्टी की अखिल भारतीय...

जंतर-मंतर के आरक्षण विरोधी प्रदर्शन पर मायावती का सवाल, राहुल गांधी की भूमिका पर भी आपत्ति

नई दिल्ली, 23 अगस्त 2026। बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल में हुए जाति आधारित आरक्षण के विरोध...

मायावती ने Gen-Alpha के स्कूल आंदोलन पर जताई चिंता, कहा- बच्चों को सड़कों पर संघर्ष के लिए मजबूर होना दुर्भाग्यपूर्ण

लखनऊ, 20 अगस्त 2026। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने देश में स्कूली शिक्षा की स्थिति और Gen-Alpha बच्चों से जुड़े...

2027 चुनाव की तैयारी में BSP: मायावती ने कहा- सर्वसमाज में बढ़ रहा पार्टी का जनाधार, सतीश चंद्र मिश्रा को मिली नई जिम्मेदारी

लखनऊ, 19 अगस्त 2026। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने...

सच्चे बौद्ध की पहचान: आचरण, शील और सामाजिक उत्तरदायित्व

आज के युग में जब मानवता नैतिक मूल्यों के संकट से जूझ रही है, तब बुद्ध का धम्म एक प्रकाश स्तंभ की तरह मार्ग...

त्रिविध पावनी वैशाख पूर्णिमा: बौद्ध स्रोतों के आधार पर एक विवेचन

नमोऽस्तु बुद्धाय विशुद्धबोधयेविशुद्धधर्मप्रतिभासबुद्धये।सद्धर्मपुण्योपगतानुबुद्धयेभवाग्रशून्याय विशुद्धबुद्धये॥(बोधिसत्त्वसमुच्चयानाम कुलदेवता, बुद्धस्तोत्र, 1) महामानवों का चरित केवल इतिहास बनकर नहीं रहता, वह चरित सदैव कालजयी होता है। वह चरित प्रत्येक काल...

बहुजन अस्मिता: प्रतीकों से वैचारिक क्रांति तक

भारतीय समाज के सांस्कृतिक और वैचारिक धरातल पर वर्तमान में जो मंथन चल रहा है, वह केवल प्रतीकों के बदलाव का विषय नहीं है,...

ब्राह्मणवाद की टीम ‘ए’-कांग्रेस और टीम ‘बी’-भाजपा : मान्यवर श्री कांशीराम साहब का नागपुर संदेश

मान्यवर साहेब, बहुजन समाज की मुक्ति के अद्वितीय योद्धा, सामाजिक परिवर्तन के प्रखर प्रचारक और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक, जिन्होंने अपनी समूची...