जेन-जी आंदोलन पर राजनीतिक दलों के प्रभाव से मायावती चिंतित, बसपा पदाधिकारियों को बड़ा निर्देश

युवाओं और बेरोजगारों की मांगों के प्रति BSP ने जताई चिंता, राज्य इकाइयों को सीजेपी अधिकारियों से मिलकर समाधान कराने के निर्देश; कार्यकर्ताओं से आंदोलन से दूर रहने को कहा

नई दिल्ली/लखनऊ, 6 सितंबर 2026। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती बहनजी ने Gen-Z और Gen-Alpha युवाओं से जुड़े आंदोलनों को लेकर रविवार को बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि युवाओं और बेरोजगारों की समस्याओं को लेकर शुरू हुआ CJP का Gen-Z आंदोलन अब विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रभाव में आता दिखाई दे रहा है, जिससे इसकी स्वतंत्रता को लेकर युवाओं और छात्रों के बीच गंभीर शंकाएं पैदा हो रही हैं.

मायावती ने आगे कहा कि जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान युवाओं और छात्रों को उनकी समस्याओं के समाधान को लेकर बड़े-बड़े सपने दिखाए गए थे. लेकिन अब आंदोलन के राजनीतिक प्रभाव में आने से उसकी प्रकृति पहले की तुलना में अधिक राजनीतिक नजर आ रही है.

Gen-Z और Gen-Alpha की मांगों पर BSP का समर्थन

मायावती बहनजी ने आंदोलन की राजनीतिक दिशा पर सवाल उठाने के साथ ही युवाओं की मूल समस्याओं से खुद को अलग नहीं किया. उन्होंने कहा कि Gen-Z और Gen-Alpha की जरूरी मांगों और समस्याओं के प्रति BSP की सहानुभूति और चिंता हमेशा रही है.

उन्होंने पार्टी की सभी राज्य इकाइयों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने राज्य और क्षेत्र में संबंधित अधिकारियों से मिलें और युवाओं की समस्याओं के शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रयास करें.

उन्होने जोड़ा, “जेन-जी (Gen-Z) व जेन-अल्फा (Gen-Alpha) की ज़रूरी माँगों को लेकर बी.एस.पी. को पूरी सहानुभूति व इसके प्रति चिन्ता भी हमेशा रही है और आगे उनके सहयोग के लिये बी.एस.पी. के सभी स्टेट यूनिटों को निर्देशित किया जाता है कि वे अपने-अपने राज्य व क्षेत्र में सम्बंधित अधिकारियों से मिलकर उनकी समस्याओं के शान्तिपूर्ण तरीक़े से समाधान के लिये ज़रूर तत्पर रहें.”

धरना-प्रदर्शन नहीं, अनुशासन में रहें BSP कार्यकर्ता

मायावती बहनजी ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए आंदोलन को लेकर स्पष्ट निर्देश भी दिए हैं. उन्होंने कहा कि BSP के लोग धरना, प्रदर्शन या आंदोलन में शामिल न हों और अपनी ऊर्जा, संसाधन तथा संगठनात्मक शक्ति को आने वाले चुनाव के लिए सुरक्षित रखें.

उन्होंने कहा कि BSP का लक्ष्य ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत पर सरकार बनाकर Gen-Z, Gen-Alpha समेत पूरे समाज की समस्याओं का स्थायी समाधान करना है.

मायावती बहनजी ने उत्तर प्रदेश में BSP की पिछली सरकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी ने सत्ता में रहते हुए ऐसी समस्याओं के समाधान के लिए काम करके दिखाया है.

जंतर-मंतर की घटना पर पुलिस कार्रवाई पर सवाल

मायावती ने Gen-Z के जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान हुई संजय आजाद से जुड़ी मारपीट की घटना का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि यदि पुलिस ने समय रहते उचित कार्रवाई की होती तो ऐसी गंभीर घटना से बचा जा सकता था.

उन्होंने संबंधित प्रकरण में आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की और कहा कि जरूरत पड़ने पर BSP ऐसे मामलों में पीछे नहीं रहेगी.

इस मामले में दिल्ली पुलिस ने 3 सितंबर को कहा था कि 23 जून के CJP प्रदर्शन के दौरान गाजियाबाद निवासी संजय कुमार के सिर में चोट लगी थी. पुलिस के अनुसार उनका RML अस्पताल में चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया था और चोटों को साधारण प्रकृति का बताया गया था.

बाद में पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज समेत कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की. 5 सितंबर की रिपोर्टों के अनुसार स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिया गया था. मामले को लेकर CJP और अन्य राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए थे.

हालांकि, इस घटना के पूरे घटनाक्रम और दोनों पक्षों के आरोपों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं. एक वीडियो के सामने आने के बाद घटना के दौरान दोनों पक्षों के बीच हाथापाई को लेकर भी सवाल उठे हैं.

मायावती के बयान में दो संदेश

मायावती बहनजी के ताजा बयान को दो स्तरों पर देखा जा सकता है. पहला, BSP ने Gen-Z और Gen-Alpha की बेरोजगारी तथा अन्य समस्याओं को गंभीर मुद्दा मानते हुए इनके समाधान के लिए प्रशासन से संवाद का रास्ता अपनाने की बात कही है.

दूसरा, उन्होंने युवाओं के आंदोलन के राजनीतिक इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए BSP कार्यकर्ताओं को ऐसे आंदोलनों से दूरी बनाए रखने का निर्देश दिया है. यह रुख BSP की मौजूदा चुनावी तैयारी और संगठनात्मक अनुशासन पर जोर को भी दर्शाता है.

मायावती का संदेश साफ: युवाओं के मुद्दे जरूरी, लेकिन BSP का रास्ता अलग

कुल मिलाकर मायावती ने एक तरफ Gen-Z और Gen-Alpha की समस्याओं के प्रति BSP की चिंता और सहयोग का भरोसा दिया है, वहीं दूसरी तरफ CJP के आंदोलन के राजनीतिक प्रभाव में आने पर सवाल उठाए हैं. साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं को सड़क पर आंदोलन करने के बजाय प्रशासन से संवाद और चुनावी तैयारी पर ध्यान देने को कहा है.

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