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मत-विमत

नकारात्मक एजेण्डे का शिकार बहुजन खुद के लिए ही घातक है

बहुजन समाज का पथभ्रष्टिकरण : सकारात्मक एजेंडा ही समाधान सामाजिक न्याय के स्वघोषित चिंतक, लेखक और पत्रकार, जो बहुजन समाज के हितों की पैरवी का...

संकल्प-दिवस विशेष: जब पेड़ के नीचे बैठकर फूट-फूटकर रोए थे बाबासाहेब

आज 23 सितम्बर संकल्प दिवस है. आज के दिन का भारत के इतिहास व बौद्धों के लिए विशेष महत्व है. घटना 23 सितम्बर 1917...

भारत राष्ट्र निर्माण हेतु संघर्षरत है बसपा

भारत राष्ट्र निर्माण : समतावादी मार्ग और बसपा की भूमिका भारत के राष्ट्र निर्माण हेतु सकारात्मक एजेंडा स्थापित कर समतावादी विचारधारा से प्रेरित होकर आत्मसंयम,...

हिन्दी दिवस पर प्रण: हिन्दीभाषा को न बनने दें हिन्दूभाषा

आज हिन्दीभाषा मात्र हिन्दू भाषा बन कर रह गई है. इस भाषा में आज 'श्रीगणेश करने' से लेकर 'वेद वाक्य' तक, 'भीष्म प्रतिज्ञा' से...

आर्थिक आधार पर आरक्षण क्यों नहीं? एक समाजशास्त्रीय आंकलन

देश में इन दिनों आरक्षण पर बहस फिर छिड़ी हुई है. खासकर मोदी सरकार ने लागू किया आर्थिक आरक्षण पर लगातार बातें हो रही...

अनकही: IAS अधिकारी बनने वाली मायावती जी कैसे बन गई मुख्यमंत्री

दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ी कॉलोनी में पली-बढ़ी बहनजी (मायावती) का जन्म 15 जनवरी 1956 को दिल्ली के लेडी हार्डिंग अस्पताल में हुआ था. उनके पिता...

अनुसूचित जातियों की महिलाओं को समानता के लिए दो मोर्चों पर लड़ना पड़ रहा है

बराबरी पर बैठने के लिए हम बाहर के लोगों से संघर्ष करते हैं लेकिन जब हम घर के अंदर होते हैं तब हम अपने...

राष्ट्र-निर्माण के लिए अधिकार पथ भी आवश्यक: प्रो विवेक कुमार

जवाहर लाल नेहरू विवि में समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विवेक कुमार ने दिल्ली स्थित जनपथ (इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक जाने वाली सड़क) का...

दलित राजनीति में ओबीसी हैं फिर ओबीसी राजनीति से दलित गायब क्यों?

दलित एक शब्द है ,जिससे एक पहचान बनती है. यह पहचान जाति की पहचान नहीं है. यह पहचान समाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान है....

ओपिनियन: अगर नेहरु की जगह अंबेडकर पीएम होते तो हालात कुछ और होते

नेहरु की जगह सरदार पटेल पीएम होते तो देश के हालात कुछ और होते. ये सवाल नेहरु या कांग्रेस से नाराज हर नेता या...

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