संसद में उठा “सेक्युलरिज़्म” हटाने का मुद्दा, मायावती बोलीं – संविधान से छेड़छाड़ बिल्कुल बर्दाश्त नहीं!

नई दिल्ली: संसद में कानून मंत्री के बयान से देश की राजनीति में हलचल मच गई है. चर्चा गर्म है कि क्या सरकार संविधान की प्रस्तावना से ‘सेक्युलरिज़्म’ (धर्मनिरपेक्षता) जैसे शब्दों को हटाने की सोच रही है? लेकिन इस पर बसपा सुप्रीमो मायावती बहनजी ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया है.

सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म X पर मायावती ने दो टूक कहा कि सरकार की न तो ऐसी कोई मंशा है और न ही कोई विचाराधीन योजना है. यह स्पष्टीकरण “बीएसपी सहित देश-दुनिया के करोड़ों लोगों के लिए राहत की खबर” है. उन्होंने इसे बाबासाहेब के संविधान की “अवमानना” की किसी भी कोशिश के विरुद्ध बताया.

बहनजी ने कहा, “देश के कानून मंत्री का कल संसद में दिया गया बयान कि संविधान की प्रस्तावना से ’सेक्युलरिज़्म’ (धर्मनिरपेक्षता) आदि शब्द हटाने सम्बंधी सरकार की ना कोई नीयत है और ना ही ऐसा कुछ विचाराधीन है, यह उचित एवं सराहनीय है तथा ख़ासकर हमारी पार्टी बी.एस.पी. सहित देश व दुनिया भर में उन सभी लोगों के लिए राहत की ख़बर है व अच्छा आश्वासन है जो परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के संविधान में इस प्रकार के किसी भी अनुचित बदलाव या छेड़छाड़ के पूरी तरह विरुद्ध हैं तथा ऐसी उठने वाली ग़लत माँग को लेकर चिन्तित भी थे.”

क्या है मामला?

देश के कानून मंत्री ने संसद में कहा कि ‘सेक्युलरिज़्म’ जैसे शब्द संविधान की प्रस्तावना में बाद में जोड़े गए थे और इसकी समीक्षा की जानी चाहिए. इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक आग लगा दी. खासकर विपक्ष ने इस मुद्दे को संविधान पर चोट बताया और फैलाए जा रहे है नैरेटिव कि- भाजपा संविधान को बदलना चाहती है- के लिए खूब इस्तेमाल किया.

मायावती ने क्यों दी प्रतिक्रिया?

मायावती ने अपने बयान में साफ किया कि भारत जैसे विविधता भरे देश में संविधान ही वह धागा है जो सभी धर्मों, जातियों और विचारों को एक सूत्र में बांधता है. उन्होंने याद दिलाया कि बाबासाहेब अंबेडकर ने सभी को बराबरी और सम्मान देने वाली सोच के आधार पर संविधान रचा था. उनके बयान से देश के सामने सच्चाई आई है और लोगों को मालूम चला है कि असल में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों मिलकर जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं.

राजनीतिक संकेत क्या हैं?

मायावती का यह बयान न केवल संविधान के पक्ष में है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि बीएसपी अब ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर बोलने के मूड में है. उन्होंने सरकार की स्थिति को “उम्मीद जगाने वाली” बताया लेकिन साथ में यह भी स्पष्ट किया कि संविधान से छेड़छाड़ पर कोई समझौता नहीं होगा. उनका यह बयान बी टीम वालों के मूँह पर भी करारा तमाचा है. अक्सर बीएसपी के बारे में झूठा प्रचार होता है कि बीजेपी के खिलाफ़ नही बोलती है. मगर, सतापक्ष के विरोध में इस तरह के बयान बहुजन समाज पार्टी की छवि के लिए बेहतर साबित होंगे.

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