आरक्षण में आरक्षण नही देना सामाजिक न्याय की मान्यता को नकारना: मायावती

महिला आरक्षण बिल: बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन कुमारी मायावती जी ने महिला आरक्षण बिल 2023 (Mahila Aarakshan Bill 2023) में एससी/एसटी/ओबीसी/अल्पसंख्यक महिलाओं को अलग से आरक्षण नही देने को सामाजिक न्याय के खिलाफ़ बताया है.

उन्होने आज X पर तीन लगातार पोस्ट कर तीसरे दिन महिला आरक्षण बिल जिसे सदन में महिला शक्ति वंदन विधेयक नाम दिया गया है पर कहा, “वैसे देश की आबादी के बहुसंख्यक ओबीसी समाज की महिलाओं को आरक्षण में शामिल (Quota in Quota) नहीं करना बहुजन समाज के उस बड़े वर्ग को न्याय से वंचित रखना है. इसी प्रकार एससी व एसटी समाज की महिलाओं को अलग से आरक्षण नहीं देना भी उतना ही अनुचित व सामाजिक न्याय की मान्यता को नकारना है.

महिलाओं को मिले तुरंत आरक्षण

बसपा सुप्रीमो ने महिला आरक्षण बिल को महिलाओं के अन्याय बताते हुए आगे कहा, “महिला आरक्षण बिल संसद के दोनों सदनों से पारित हो जाने का स्वागत, किंतु देश इसका भरपूर व जोरदार स्वागत करता अगर उनकी अपेक्षाओं के मुताबिक यह अविलम्ब लागू हो जाता. अब तक लगभग 27 वर्षों की लम्बी प्रतीक्षा के बाद अनिश्चितता का अब आगे और लम्बा इंतजार करना कितना न्यायसंगत?

गौरतलब है कि महिला आरक्षण बिल तुरंत लागू नही होगा. इसे पूर्ण रूप से धरातल पर लागू करने के लिए पहले जनगणना करानी होगी. इसके बाद सीटों का परिसीमन होगा. तब जाकर महिलाओं के लिए अलग से सीटे रिजर्व की जाएगी. यह प्रक्रिया इस चुनाव तक नही होगी. इसलिए, यह बिल सिर्फ चुनावी झांसा बनकर रह गया है. जिसे बहनजी ने महिलाओं की आंखों में धूल झोंकना बताया है.

उन्होने अल्पसंख्यक महिलाओं को आरक्षण में शामिल नही करने पर भी अपनी बात रखी और कहा, “किंतु जहाँ चाह वहाँ राह है इसलिए सरकार ओबीसी समाज को इस महिला आरक्षण बिल में शामिल करे, एससी व एसटी वर्ग की महिलाओं को अलग से आरक्षण दे तथा इस विधेयक को तत्काल प्रभाव से लागू करने के सभी जरूरी उपाय करे. धार्मिल अल्पसंख्यक समाज की महिलाओं की भी उपेक्षा भी अनुचित.”

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