राजेंद्र पाल गौतम का बौद्ध धम्म का शोर बहुजनों को 2024 के राजनैतिक लक्ष्य से भ्रमित करने की साजिश तो नही:एम आर आदर्श

16/8/2011 को शुरू RSS प्रोडक्ट अन्ना हजारे आंदोलन से कांशीराम जी की शैडो बामसेफ ने समझाया था कि दिल्ली कांग्रेस सरकार के विरुद्ध एंटी-इनकंम्बेंसी फैक्टर से बसपा की ओर बहुजन वोट रोकने हेतु ‘आप’ विकल्प बनाया जा रहा है. आर्टिकल भी लिखा था कि ‘नूराकुश्ती के दो पहलवान,नरेंद्र मोदी-केजरीवाल.’

हुआ वही कि दिल्ली में वाल्मीकि वोट को रिझाने के मनुवादी पार्टी-C झाड़ू चुनाव चिह्न के साथ बनायी गई और ईवीएम सरकार बनाकर दिल्ली में कांग्रेस का विकल्प बन गई. केंद्र सरकार ने भी स्वच्छता अभियान के तहत अम्बेड़कर वादियों की दिल्ली से सफाई का भाव रखा, जिसमें श्री केजरीवाल की झाड़ू ने केंद्र के स्वच्छता अभियान में सहयोग दिया.

11 मार्च 2017 में बसपा ने यूपी पराजय का कारण ईवीएम माना और यह पहली पार्टी थी जिसने ईवीएम बैन करने का 11 अप्रैल 2017 से आंदोलन का ऐलान किया, जिसे हाईजैक करने के लिए आम आदमी पार्टी ने विधानसभा सभा में ईवीएम हैकिंग का डेमो दिखाया ताकि बसपा का ईवीएम आंदोलन प्रभावहीन बनाया जा सके.

इसके बाद कम समय में पंजाब में भी ईवीएम सरकार बनाकर श्री केजरीवाल को सी टीम के रूप में मजबूत किया रहा है.

लेकिन इसके बाद समूचे बहुजन पार्टियों का 2024 में तीसरे मोर्चे के  नेतृत्व के मद्देनजर बसपा सुप्रीमो के प्रति बनते रुझानों को काउंटर करने तथा ईवीएम व राजनैतिक चिंतन से ध्यान डायवर्ट करने के लिए राजेंद्र पाल गौतम को बौद्ध धम्म को मोहरा बनाया. आरएसएस जानती है 1956 के बाद जिस तरह महाराष्ट्र में महारों को बौद्ध धम्म के नाम पर राजनीति के नाम पर बुद्धू बनाया उसी तरह क्यों न अब चमारों को ‘आप’ पार्टी के मंत्री राजेन्द्र पाल गौतम को आगे कर बौद्ध धम्म क्रांति के नाम पर शोर मचाया जाय और राजनैतिक दिशा से बहुजन का ध्यान डायवर्ट कर बौद्ध धम्म की तरफ मोड़ा जाय? ताकि 2024 में ईवीएम-सरकार को बनाकर मक़सद पूरा किया जा सके.

इसलिए बहुजनों को कांशीराम जी की बात याद रखना चाहिए कि इतिहास गवाह है, जब-जब जिसका शासन रहा है उसी का धर्म फैला है, सम्राट अशोक का शासन रहा तो बौद्ध धम्म का विस्तार हुआ, मुट्ठी भर मुगलों का शासन रहा तो इस्लाम का विस्तार हुआ और अंग्रेजों का शासन रहा तो ईसाई धर्म का विस्तार हुआ.

इसलिए वोट के अस्त्र से  सत्ता हथियाना बहुजन का मकसद होना चाहिए.

(लेखक: एम आर आदर्श. यह लेखक के अपने विचार हैं.)

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