कांग्रेस और बसपा गठबंधन की चर्चा बहुजन राजनीति में बाधा?

कांग्रेस का कमजोर होना ही बसपा का मजबूत होना है. क्योंकि, कांग्रेस का स्थाई कैडराइज्ड वोट नहीं है. इसलिए कांग्रेस से समझौते से बसपा को कोई लाभ नहीं है बल्कि उल्टा नुकसान ही होगा.

आजकल देश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी की चर्चा जोर पकड़ रही है. खासकर भगवान बुद्ध की धरती बिहार से बनने वाले महागठबंधन के बाद बसपा और बसपा सुप्रीमो मायावती जी के स्टैंड को लेकर देश की जनता एक बात पर लामबंध दिख रही है कि भाजपा को रोकने के लिए बसपा को कांग्रेस के साथ गठबंधन करना चाहिए.

इसी बात की पड़ताल मैं कुछ बिंदुओं से करना चाहुंगा और बहुजन समाज पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं को एवं बहुजन समाज के मिशनरीयों को समझाने का प्रयास करूँगा कि क्यों बसपा और कांग्रेस का गठबंधन देश और बसपा के लिए ठीक नहीं है.

क्या बसपा को कांग्रेस से गठबंधन करना चाहिए? क्या बसपा को महागठबंधन का हिस्सा बनना चाहिए? क्या भाजपा को रोकने के लिए बसपा को कांग्रेस से गठबंधन करके चुनाव लड़ना चाहिए?

इन सभी सवालों के जवाब आपको नीचे बिंदुवार देने का प्रयास करूँगा.

  1. बसपा का उदय क्यों हुआ?
  2. कांग्रेसी सरकारों ने बहुजनों के लिए क्या किया?
  3. कांग्रेस और बसपा का कैडर वोट?

बसपा का उदय क्यों हुआ?

इस सवाल का उत्तर ही कांग्रेस सरकार की 26 जनवरी 1950 से बहुजन हितों के प्रति प्रतिबद्धता का अभाव है- जैसे बाबासाहेब ने अन्य पिछड़ों के अधिकारों लिए लिखे अनुच्छेद 340 के क्रियान्वयन की उदासीनता, अनुच्छेद 341 व 342 के तहत एससी-एसटी के आरक्षित पदों को शतप्रतिशत भरने के प्रति उदासीनता आदि.

अर्थात कांग्रेस सरकार द्वारा संविधान को ईमानदारी से लागू न करने की मंशा की प्रतिक्रिया में बहुजन नायक कांशीराम ने बसपा की नींव इन नारों पर रखी कि-

85 पर 15 का शासन नहीं चलेगा नहीं चलेगा!

वोट हमारा राज तुम्हारा नहीं चलेगा नहीं चलेगा!

जो जमीन सरकारी है वो जमीन हमारी है!

आरक्षण से लेंगे एस पी डीएम, वोट से लेंगे सीम पीएम!

जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी!

आदि

कांग्रेसी सरकार ने बहुजनों लिए क्या किया?

इसका अप्रत्यक्ष उत्तर है कि कांग्रेस ने अगर ईमानदारी से संविधान का क्रियान्वयन किया होता तो बसपा का उदय ही न होता. अर्थात संविधान की प्रस्तावना ही बसपा का घोषणा पत्र है. इसलिए अन्य दलों की तरह बसपा अपना कभी चुनावी घोषणापत्र जारी नहीं करती है.

अन्य दल इसलिए अपने चुनावी घोषणा पत्र को जारी करते हैं ताकि  भोली-भाली अशिक्षित जनता को सब्जबाग दिखाकर उनका वोट लेने के लिए अपनी ओर आकर्षित किया जा सके.

बाद में जनता के लिए ये घोषणाएं मृगमरीचिका साबित होती हैं.

लेकिन बसपा छद्म घोषणापत्र में नहीं संविधान लागू करने की बात करती दिखती है, जिसके उदाहरण भी उसकी सरकारों ने प्रस्तुत किये. कानून के द्वारा कानून का राज की सीख लेकर अन्य राज्यों की सरकारों ने उसकी योजनाओं को मोडिफाइड कर लागू किया.

बसपा के बढ़ते जनाधार से कांग्रेस कमज़ोर पड़ने लगी. एस सी, एसटी, ओबीसी जातियाँ कांग्रेस से खिसकने लगी, वे कहने लगी आजादी से अब तक हम किराये के मकान में रहते आ रहे थे अब हमारा स्वयं का घर बन गया है. इसलिए अपने घर में रूखी-सूखी रोटी खाकर स्वाभिमान व सम्मान से रहेंगे.

बहुजनों के वोट को कैसे रोका?

उसके लिए 15 मार्च 1989 को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 में धारा 61क जोड़कर ईवीएम को चुनाव का माध्यम बनाया जो अलोकतांत्रिक है. आज यही ईवीएम देश की जनता के लिए सर दर्द है और कांग्रेस मंद-मंद मुस्करा नहीं रही है तो फिर ईवीएम बैन का आंदोलन क्यों नहीं करती है. चुप क्यों? क्या कोई भाजपा से समझौता तो नहीं? इस बात से इंकार इसलिए भी नहीं किया जा सकता कि वे हिंदू संस्कारों की दृष्टि से एक गुरु के शिष्य हैं, एक ही विचारधारा से संस्कारित हैं. दोनों का उद्देश्य भी हिंदुत्व की रक्षा करना है यानि जातीय आधारित समाज यानि  सामाजिक असमानता बनाये रखना.

1885 में संस्थित कांग्रेस के हिंदुओं ने हिंदू महासभा (1922) और 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गैर पंजीकृत संगठन बनाया जो आज भी असंवैधानिक हैं.

कांग्रेस और बसपा का कैडराइज्ड वोटर

कांग्रेस का कैडराइज्ड वोट जो हिदुत्व की रक्षा के लिए बैचारिक रूप से कट्टर है, भाजपा का स्थायी आधार बन चुका है,  कुछ सवर्ण भले ही कांग्रेस के झंडाबरदार बनकर औपचारिकता का निर्वहन करते दिखते हैं, लेकिन वो अंततः हिन्दू राष्ट्र यानि ब्राह्मण राज के पैरोकार और भाजपा के समर्थक हैं.

संक्षिप्त में कह सकते हैं कि कांग्रेस और भाजपा का कैडराइज्ड व्यक्ति एक बिचारधारा अर्थात् हिदु राष्ट्र का पैदावार है जो भाजपा का बेस वोट है. निष्कर्षत: कांग्रेस का कोई बेस वोट नहीं है बल्कि एससी-एसटी ओबीसी को भ्रमित कर आश्वासन के आकर्षण से बांधकर रखा जाता रहा है.

बसपा का कैडराइज्ड वोट एससी-एसटी ओबीसी है जो उसका स्थाई आधार वोट है, जो ठीक उसी तरह कट्टर है जिस तरह भाजपा का वोटर.

यहाँ याद रखने वाली बात यह है कि बहुजन समाज पार्टी 6,743 जातियों की जातीय पीड़ा के आधार पर अधिष्ठित है जिन्हें एकता के सूत्र में बांधकर बहुजन कहा है. जातियों में विभक्त ये मूलनिवासी पूर्व बौद्ध हैं. आजादी के समय से ये जातियाँ अज्ञानता वश कांग्रेस का वोट बैंक रहीं लेकिन, साहेब कांशीराम ने इन्हें इतिहास बोध से बहुजन समाज पार्टी का बेस वोट बना दिया. ये सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से भाजपा के आधार वोटरों की बिचारधारा से भिन्न हैं.

उपरोक्त तथ्यों से निष्कर्ष निकलता है कि कांग्रेस का कमजोर होना ही बसपा का मजबूत होना है. क्योंकि, कांग्रेस का स्थाई कैडराइज्ड वोट नहीं है. इसलिए कांग्रेस से समझौते से बसपा को कोई लाभ नहीं है बल्कि उल्टा नुकसान ही होगा.

जिन जातियों के मानस पटल पर कांशीराम के परिश्रम से प्रत्येक सीट पर हाथी निशाना अंकित हो चुका है,  समझौते की स्थिति में हाथ का पंजा घर कर जाएगा. तब फिर मान्यवर कांशीराम हाथी के निशान अंकित करने के लिए दुबारा नहीं आ सकते. साथ ही वोट प्रतिशत में गिरावट ही होगी, क्योंकि सीताराम केसरी के समय में बसपा कांग्रेस का गठबंधन उदाहरण बन चुका है कि सवर्णों के वोट बसपा प्रत्याशी को ट्रांसफर नहीं होते हैं.

जबकि कांशीराम का मूल मिशन वोट प्रतिशत में वृद्धि है न कि सीट प्रतिशत में वृद्धि. इसलिए कांग्रेस से समझौते में कांशीराम का वोट प्रतिशत वृद्धि मिशन संकट में आ जाएगा जिससे पार्टी की राज्यों और राष्ट्रीय मान्यता खतरे पड़ जाएगी.

इसलिए कांशीराम के मिशनरियों को बसपा और कांग्रेस के समझौते की सोचना नादानी होगी.

(लेखक: डॉ.एम.आर. रैपुरिया ‘आदर्श’ , यह लेखक के अपने विचार हैं)

Download Suchak App

खबरें अभी और भी हैं...

ओपिनियन: दलितों के साथ अनदेखी क्यों?

आज भी देश में अगर दलितों की स्थिति पर नजर डाली जाए तो उनकी स्थिति दयनीय बनी हुई है. मौजूदा वक्त में तो इसे...

मायावती बहनजी का बड़ा फैसला, आकाश के बाद ईशान भी गए, बहन दीपिका के लिए खोला दरवाजा

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती बहनजी ने परिवारवाद को लेकर अपने रुख को एक बार फिर स्पष्ट किया है. उन्होंने...

जेन-जी आंदोलन पर राजनीतिक दलों के प्रभाव से मायावती चिंतित, बसपा पदाधिकारियों को बड़ा निर्देश

नई दिल्ली/लखनऊ, 6 सितंबर 2026। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती बहनजी ने Gen-Z और Gen-Alpha युवाओं से जुड़े आंदोलनों को लेकर...

डॉ. राधाकृष्णन का जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में क्यों?

यह सवाल हैरान करने वाला है कि डॉ. राधाकृष्णन के जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में क्यों मान्यता दी गई? उनकी किस विशेषता...

मायावती का बड़ा ऐलान: अब किसी से गठबंधन नहीं, अकेले चुनाव लड़ेगी BSP; आकाश आनंद पर भी साफ संदेश

लखनऊ, 3 सितंबर 2026। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती बहनजी ने आज गुरुवार को लखनऊ में आयोजित पार्टी की अखिल भारतीय...

जंतर-मंतर के आरक्षण विरोधी प्रदर्शन पर मायावती का सवाल, राहुल गांधी की भूमिका पर भी आपत्ति

नई दिल्ली, 23 अगस्त 2026। बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल में हुए जाति आधारित आरक्षण के विरोध...

मायावती ने Gen-Alpha के स्कूल आंदोलन पर जताई चिंता, कहा- बच्चों को सड़कों पर संघर्ष के लिए मजबूर होना दुर्भाग्यपूर्ण

लखनऊ, 20 अगस्त 2026। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने देश में स्कूली शिक्षा की स्थिति और Gen-Alpha बच्चों से जुड़े...

2027 चुनाव की तैयारी में BSP: मायावती ने कहा- सर्वसमाज में बढ़ रहा पार्टी का जनाधार, सतीश चंद्र मिश्रा को मिली नई जिम्मेदारी

लखनऊ, 19 अगस्त 2026। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने...

Opinion: जाति (अ)व्यवस्था का उन्मूलन कैसे हो?

जाति (अ)व्यवस्था का निर्माण, शासकीय संरक्षण और उसके उन्मूलन का वैचारिक विश्लेषण भारतीय समाज की सबसे गहरी और जटिल समस्या है. यह आलेख जाति...

सच्चे बौद्ध की पहचान: आचरण, शील और सामाजिक उत्तरदायित्व

आज के युग में जब मानवता नैतिक मूल्यों के संकट से जूझ रही है, तब बुद्ध का धम्म एक प्रकाश स्तंभ की तरह मार्ग...

त्रिविध पावनी वैशाख पूर्णिमा: बौद्ध स्रोतों के आधार पर एक विवेचन

नमोऽस्तु बुद्धाय विशुद्धबोधयेविशुद्धधर्मप्रतिभासबुद्धये।सद्धर्मपुण्योपगतानुबुद्धयेभवाग्रशून्याय विशुद्धबुद्धये॥(बोधिसत्त्वसमुच्चयानाम कुलदेवता, बुद्धस्तोत्र, 1) महामानवों का चरित केवल इतिहास बनकर नहीं रहता, वह चरित सदैव कालजयी होता है। वह चरित प्रत्येक काल...

Samyak Calendar 2026: बहुजन महापुरुषों की जयंती पुण्यतिथि उपोसथ दिन सरकारी छुट्टी ऐतिहासिक तारीखें

Samyak Calendar 2026: कैलेंडर सिर्फ तारीख नही बताते हैं बल्कि इतिहास को भी जीवंत करते हैं. कैलेंडर खोलते ही मन समय में पीछे जाने...