मान्यवर कांशीराम को भारत रत्न क्यों?

मान्यवर को उनके परिनिर्वाण दिवस पर आदरांजलि देने के अनेक कारण है. परंतु मेरे दृष्टिकोण में उन सब में सबसे महत्वपूर्ण कारण यह है कि उन्होने बहुजन राजनीति के माध्यम से भारतीय संविधानिक प्रजातंत्र को मजबूत किया एवं राष्ट्र निर्माण में अपनी अग्रनी भूमिका निभाई.

मान्यवर ने स्वतंत्र एवं संवैधानिक भारत में बहुजनों की आत्मनिर्भर राजनीति का नवीन मॉडल दिया. बहुजनों की राजनीति का नया व्याकरण गढ़ा. अपने शोध के आधार पर अगर मैं यह कहूँ की दुनिया में राजनीति का यह अनोखा मॉडल है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी.

कांग्रेस, मार्क्सवदियों, समाजवादियों एवं भाजपा की राजनीति के मॉडल की जड़े कहीं न कहीं विदेशी धरतियों के मॉडल से जुड़ती है. उनकी कॉर्पोरेट फंडिग भी जग जाहिर है.
प्रो विवेक कुमार
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लेकिन, मान्यवर का भारत में दलीय राजनीति का अपना ओर्जिनल मॉडल है. उस मॉडल में बाबासाहेब द्वारा दिए अनेक सूत्रों को उन्होने आत्मसाथ करते हुए उसे नवीन दिशा दी. उस मॉडल के कुछ बिंदु निम्न हैं:

  1. हमारा अपना एक आत्मनिर्भर राजनैतिक दल होना चाहिए.
  2. हमारी पार्टी की अपनी विचारधारा होनी चाहिए.
  3. हमारी पार्टी के अपने नायक/नायिकाएं होने चाहिए.
  4. हमारी पार्टी को स्वयं फंड करना चाहिए.
  5. हमारी पार्टी के अपने नारे (Slogan) होने चाहिए.
  6. हमारी पार्टी का एजेंडा है: सामाजिक परिवर्तन एवं आर्थिक उत्थान.
  7. हमारी पार्टी के अपने कार्यक्रम और कैडर होने चाहिए.

उपरोक्त सोच और रणनीति के आधार पर उन्होने आधुनिक भारत की दलीय राजनीति की दिशा ही बदल दी. सच में उनके नारे वास्तविक रूप लेने लगे. बड़ी-बड़ी स्थापित पार्टियां उनसे गठबंधन के लिए लालायित रहती थी. कार्पोरेट घराने उनको फंड देने को भी तैयार रहते थे. राज्यसभा में जाने के लिए अनेक लोग करोड़ों देने को तैयार रहते थे.

परंतु मान्यवर ने अपने दल एवं अपने लोगों के हित को हमेशा सर्वोपरी रखा और भारतीय प्रजातंत्र का सबसे बड़ा अजुबा करके दिखा दिया. जब उन्होने दलित समाज की बेटी एड. मायावती जिन्हे आदरवश लोग बहनजी कहते हैं को उत्तर प्रदेश का एक बार नहीं चार-चार बार मुख्यमंत्री बना दिया. इस प्रकार मान्यवर ने बहुजन राजनीति के माध्यम से भारतीय संवैधानिक प्रजातंत्र को मजबूत किया एवं राष्ट्र निर्माण में अपनी अग्रणी भूमिका निभाई.

अब आप ही फैंसला कीजिये की ऐसी विभूति को भारत रत्न क्यों नहीं दिया जाना चाहिए. माननीय बहनजी मान्यवर कांशीराम को भारत रत्न देने की  मांग सरकर से पहले ही कर चुकी है. जिस दिन मान्यवर को भारत रत्न से नवाजा जायेगा वह दिन भारतीय प्रजातंत्र के लिए बड़ा दिन होगा. परंतु वह दिन कब आएगा? उस दिन का बेसबरी से इंतजार है. मान्यवर को मेरी भावभीनी आदरांजलि.

(लेखक: प्रोफेसर विवेक कुमार, ये लेखक के अपने विचार हैं.)

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